Subscribe Us

जब बार बार मंजिल तक पहुंचने मै निराशा मिले तो क्या करना चाहिये ? मंजिल को बदल लेना चाहिए या फ़िर 👇👇👇

ये दुनिया किसी को भी न चैन से जीने दे सकती थी ना  ही देने देगी ये सत्य है परन्तु इसका  ये मतलब नहीं की हम जीना छोड़ देंगे या जीने की उम्मीद | दुनिया जितनी जालिम बनेगी उतने ही मजबूत हम बनेगे | 

जिस काम मै आप का मन लगे और वो आप काम  भी रहे हो परन्तु आप बार बार उसमे असफ़ल होजारहे  है तो आप अपना रास्ता बदल के देखिये ना की मज़िल को | आप लोग को पता ही होगा एक जगह पहुंचने के कई  रस्ते होते है क्रिन्तु रस्ते का चैन हमें खुद करना पड़ता है अपने अनुसार | असफल होने के कारण  मन को निराश न होने दे आप केवल इतना ही सोचे की आप अपने मजिल तक कैसे पहुंचेंगे और  बाद आपको ये सब करना जब याद आएगा तू आपका मन कैसा होगा | 


मन को किसी भी प्रस्थिति मै नकारात्मक ऊर्जा से बचाने की कोसिस आप सदैव करे | प्रयाश करना कभी मत छोड़े  देर से ही सही सफलता जरूर मिलेगी | 



Post a Comment

0 Comments