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ललित बाबू की हत्या:बिहार का सबसे बड़ा हत्याकांड: 47 साल तक जांच सबसे बड़ा अन्याय, न्याय के लिए अब तीसरी पीढ़ी कोर्ट पहुंची

 

2/01/1975 को बम से हमला हुआ, 3/01/1975 को ललित बाबू की मौत हो गई। - Dainik Bhaskar
2/01/1975 को बम से हमला हुआ, 3/01/1975 को ललित बाबू की मौत हो गई।

तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी व उनके बेटे संजय गांधी के बेहद करीबी रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र की हत्या, देश का इकलौता हाई प्रोफाइल मर्डर केस है, जो पावर गैलरी को बहुत संदेही भाव में लपेटे हुए पिछले 47 वर्षों से जांच-कोर्ट-जेल-बेल में उलझा है; जिसकी दोबारा जांच की दरकार तो शुरू से मानी गई और इधर अदालती हस्तक्षेप से इसकी गुंजाइश भी बनी है। बीते 21 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल तथा जस्टिस रजनीश भटनागर की खंडपीठ ने ललित बाबू के पौत्र वैभव मिश्र को इस मामले में पक्षकार बनाया। सुनवाई में सीबीआई के वकील की सहायता करने की इजाजत दी। वैभव कहते हैं-यह हत्याकांड की दोबारा जांच की शुरुआती कड़ी है। वे हत्याकांड के असली जिम्मेदारों को सामने लाने के लिए दोबारा जांच चाहते हैं। हाईकोर्ट ने उनकी अर्जी को अभी खारिज नहीं किया है। बहरहाल, देखिए-जानिए सबकुछ हुबहू...

कई सवाल 1975 : सीबीआई डायरेक्टर पहुंचे थे समस्तीपुर, पुलिस की रिपोर्ट खारिज की

  • 2 जनवरी 1975 को बम हमले में गंभीर रूप से घायल ललित बाबू को इलाज के लिए घटनास्थल (समस्तीपुर) से 40 किमी दूर डीएमसीएच (दरभंगा) की बजाय 169 किमी दूर दानापुर रेलवे अस्पताल क्यों लाया गया?
  • उनको ले जाने वाली स्पेशल ट्रेन को समस्तीपुर स्टेशन पर शंटिंग में ही 1 घंटा 10 मिनट लगा। यह रास्ते में कई जगह रूकी। क्यों?
  • जब बिहार की पुलिस/सीआईडी तेजी से जांच कर रही थी, दो लोगों ने अपना हाथ कबूल लिया, कांग्रेसी नेता रामविलास झा, यशपाल कपूर, रघुनाथ पांडे का नाम लिया। तो अचानक जांच सीबीआई को क्यों सौंपी गई?
  • सीबीआई ने बिहार पुलिस की जांच को नकार दिया। अपने को हत्यारा बता रहे लोगों को निर्दोष कहा। उनके दावे को खारिज किया। आनंदमार्गियों को दोषी बताया। ऐसा क्यों?
  • ललित बाबू की पत्नी ने 1977 में केंद्रीय गृह मंत्री से कहा-सीबीआई असली हत्यारों को बचाने को अलग एंगल दे रही। दोबारा जांच हो। पर नहीं हुई। क्यों?
  • तमाम बातों और परिस्थितिजन्य साक्ष्य की मौजूदगी के बावजूद केंद्र सरकार द्वारा गठित मैथ्यू आयोग किसी लायक निष्कर्ष पर क्यों नहीं पहुंच सका?

2022 : हमने हर एंगल से जांच की, सजा भी हुई : सीबीआई

दिल्ली हाईकोर्ट इस हत्याकांड के दोषियों की अपील को सुन रहा है। दोषी, निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट आए हैं। आखिर इस स्टेज पर फिर से जांच कैसे हो सकती है? सीबीआई ने हर एंगिल से जांच की। तय अरोपों को बेस करके ही निचली अदालत में मुकदमा चला। फिर सजा हुई। -राजेश कुमार, सीबीआई के वकील। (राजेश, ये बातें दिल्ली हाईकोर्ट तक से भी कह चुके हैं।)

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